भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 2026 में होने वाले पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय पर्यवेक्षकों को उनके दायित्वों को लेकर ब्रीफिंग दी। पर्यवेक्षकों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी रखने और किसी भी अनियमितता की रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भारत निर्वाचन आयोग ने आज असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले केंद्रीय पर्यवेक्षकों के लिए ब्रीफिंग बैठकें आयोजित कीं। ये ब्रीफिंग नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) में आयोजित की गईं, जो 5 और 6 फरवरी 2026 को दो दिनों तक चलेंगी।
कुल 1,444 अधिकारियों को इस ब्रीफिंग के लिए बुलाया गया है, जिनमें 477 सामान्य पर्यवेक्षक, 451 पुलिस पर्यवेक्षक और 516 व्यय पर्यवेक्षक शामिल हैं। विस्तृत मार्गदर्शन और बेहतर संवाद सुनिश्चित करने के लिए सत्रों को तीन बैचों में आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने पर्यवेक्षकों को संबोधित किया। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने पर्यवेक्षकों को “निर्वाचन आयोग के प्रकाश स्तंभ” बताते हुए स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में उनकी अहम भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी उपस्थिति 824 विधानसभा क्षेत्रों में पूरे चुनावी तंत्र को सक्रिय और सशक्त बनाएगी।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू ने पर्यवेक्षकों से आग्रह किया कि वे क्षेत्र में चुनाव अधिकारियों के लिए मित्र, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों के निर्वाचन क्षेत्रों में आगमन की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित की जानी चाहिए और उन्हें मतदाताओं के लिए सुलभ रहना चाहिए, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके और किसी भी प्रकार के पक्षपात की धारणा न बने।
निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने निर्वाचन आयोग के निर्देशों के सख्त और निष्पक्ष क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्यवेक्षकों को यह भी निर्देश दिया कि मतदाता सूचना पर्चियों (VIS) का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि मतदान के दिन मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आयोग ने पर्यवेक्षकों के साथ संवादात्मक शंका-समाधान सत्र भी आयोजित किए। वरिष्ठ ECI अधिकारियों ने उन्हें मतदाता सूची की तैयारी, पाँचों चुनावी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव संचालन, आईटी अनुप्रयोगों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मीडिया से जुड़े विषयों पर जानकारी दी।
पर्यवेक्षकों को चुनाव कानूनों, नियमों और दिशा-निर्देशों का गहराई से अध्ययन करने और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आयोग को सीधे फीडबैक देने के निर्देश दिए गए। साथ ही, उन्हें राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए पूरी तरह सुलभ रहने और शिकायतों के समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने को कहा गया।
इसके अलावा, पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों का दौरा करने और हाल की मतदाता-केंद्रित पहलों के क्रियान्वयन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए, जिसमें मतदाताओं के लिए सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएँ (AMFs) प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया।
भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20B के तहत प्रदत्त अपने व्यापक अधिकारों के अंतर्गत केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें और क्षेत्रीय स्तर पर चुनावी प्रक्रिया का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
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