वॉशिंगटन पोस्ट में बड़ी छंटनी, 300 पत्रकारों की विदाई - ईशान थरूर भी प्रभावित

वॉशिंगटन पोस्ट

अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र द वॉशिंगटन पोस्ट में बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है। करीब 800 पत्रकारों वाले इस संस्थान से लगभग 300 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। इस सूची में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर का नाम भी शामिल है। कई पत्रकारों ने इस फैसले को बेहद दुखद और चौंकाने वाला बताया है।

जानकारी के अनुसार, यह फैसला 4 फरवरी को लिया गया। अख़बार के कार्यकारी संपादक ने एक आंतरिक बैठक में कर्मचारियों को बताया कि संगठन को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी समझा गया है। पत्रकारों को ई-मेल के जरिए सूचित किया गया कि किसे संस्था में रखा जा रहा है और किसे नहीं।

प्रबंधन का कहना है कि अख़बार अब भी पुराने प्रिंट-केंद्रित मॉडल पर काफी हद तक निर्भर है, जबकि मीडिया की दुनिया तेज़ी से डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही है। कम लागत में ज्यादा काम और बदलती पाठक-पसंद के कारण संगठन को अपने ढांचे में बदलाव करना पड़ रहा है।

इस छंटनी का असर कई विभागों पर पड़ा है। खेल विभाग के ढांचे में बदलाव किया जा रहा है, किताबों से जुड़ा सेक्शन बंद कर दिया गया है, अंतरराष्ट्रीय कवरेज के लिए सीमित संख्या में पत्रकार रखे गए हैं, कुछ रिपोर्टरों का काम अस्थायी रूप से रोका गया है, ग्राफिक्स टीम को काफी छोटा कर दिया गया है और एडिटिंग टीम में भी फेरबदल की तैयारी है।

 ईशान थरूर भी प्रभावित

एक पत्रकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट कवरेज से जुड़ी पूरी टीम को हटा दिया गया है। अख़बार से जुड़े रहे पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि 145 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। काहिरा स्थित मिडिल ईस्ट प्रमुख ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि पूरी टीम को हटाए जाने का तर्क समझना मुश्किल है, लेकिन उन्होंने अपने सहयोगियों के प्रति आभार जताया।

कुछ पत्रकारों को फील्ड में रिपोर्टिंग के दौरान ही लेऑफ की जानकारी मिली, जिससे नाराज़गी और दुख और बढ़ गया। सोशल मीडिया पर कई पत्रकारों ने अचानक की गई इस छंटनी की आलोचना की है।

ईशान थरूर ने भी अपने संदेश में कहा कि वे 12 साल से इस संस्थान से जुड़े थे और यहां उन्होंने कई यादगार अनुभव और दोस्त बनाए। उन्होंने अपने कॉलम और पाठकों से मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और न्यूज़रूम की मौजूदा स्थिति को देखकर दुख जताया।

मीडिया जगत में चर्चा है कि अमेरिका में मीडिया पर बढ़ते राजनीतिक दबाव और आर्थिक चुनौतियों के कारण ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक अख़बार के मालिक जेफ बेजोस की ओर से इस छंटनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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