असम चुनाव से पहले विकलांगों ने उठाई राजनीतिक समावेशन की मांग

असम चुनाव से पहले विकलांगों ने उठाई राजनीतिक समावेशन की मांग

असम विधानसभा चुनावों से पहले, 21 फरवरी को विकलांग व्यक्तियों (PwDs) ने राज्य में राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने, सभी शासन स्तरों पर आरक्षण देने और विकलांग अधिकार कानूनों के समयबद्ध क्रियान्वयन की मांग की।

यह मांग ‘मेरा वोट, मेरा भारत’ अभियान के तहत आयोजित राज्य-स्तरीय परामर्श में उठाई गई, जिसे नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल (NCPEDP) ने यंग इंडियंस गुवाहाटी के सहयोग से और Mphasis F1 फाउंडेशन के समर्थन से आयोजित किया। इस परामर्श में 130 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें PwDs, विकलांग व्यक्तियों के संगठनों (OPDs) के प्रतिनिधि और उद्योग हितधारक शामिल थे।

NCPEDP के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा, “लोकतंत्र का सार सभी नागरिकों की समान भागीदारी में निहित है। विकलांग लोग दान की मांग नहीं कर रहे हैं; वे राजनीतिक भागीदारी का अपना संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित कर रहे हैं।”

मुख्य मांगों में सभी शासन संरचनाओं में PwDs के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण, लिंग और विकलांगता-सहित पंचायतों की अनिवार्यता, निजी क्षेत्र की पहलों को प्रोत्साहन जो पहुंच और समावेशन बढ़ाएँ, और किफायती तथा सुलभ निजी स्वास्थ्य बीमा शामिल हैं। प्रतिभागियों ने समावेशी शिक्षा के लिए स्पष्ट बजटीय आवंटन, विकलांगता पर संवेदनशीलता और प्रशिक्षण, सुलभ खेल सुविधाओं की स्थापना और जागरूकता अभियान की भी मांग की।

इस परामर्श का उद्देश्य PwDs के लिए राजनीतिक दलों को अपनी अपेक्षाएँ व्यक्त करने का मंच तैयार करना था। इन मांगों को एक औपचारिक चार्टर में समेकित किया जाएगा और मुख्य राजनीतिक दलों को दिया जाएगा, ताकि इसे उनके चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया जा सके।

असम में 2 लाख से अधिक पंजीकृत विकलांग मतदाता हैं, और आयोजकों का कहना है कि यह पहल आगामी मार्च-अप्रैल में होने वाले चुनावों में राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को प्रभावित कर सकती है।

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